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आपको अपना प्राइमरी स्कूल याद है?
वो दिन जब पेंसिल से लिखने से ज़्यादा मज़ा पेंसिल की नोंक बनाने में आता था…
और कागज़ तले सिक्का रखकर पेंसिल से घिसते थे तो कागज़ पर एक सिक्का उभर आता था… अब वो सिक्का कहीं नहीं चलता…
पर वो स्कूल अब भी वहीं हैं… जहाँ आप बैठते थे अब वहाँ कोई और बैठता है। उन दिनों भी किस्से – कविताएँ कोई नहीं सुनाता था… न किताबें थीं… आज भी नहीं जैसा ही है… पर हो सकती हैं…