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‘इकतारा ’ क्यों?

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…क्योंकि हम प्रेम करते हैं। अपनी दुनिया से, लोगों से, जीवों से, नदियों, पेड़-पौधों से।

जब एक शानदार कहानी पढ़ते हैं, एक शानदार कविता पढ़ते हैं या कोई लेख पढ़ते हैं या कोई चित्र देखते हैं जो हमें आनंद से भर देता है या जो किसी के दुख में हमें शामिल करता है तो शामिल होने का भी सुख मिलता है।

हमें अकसर लगता है कि क्या हमारे बच्चे…हम सबके बच्चे…भी कला और साहित्य और अपने आसपास की चीज़ों का ऐसे ही आनंद उठा सकते हैं?

हिन्दी में ही देखें तो सामग्री बहुत है। हज़ारों किताबें हैं। पर उनमें बहुत कम ऐसी हैं जिनमें पाठक शामिल हो सकें या आनंद उठा सकें।

ये किताबें पाठकों में अनुभव पैदा करने में भी नाकाम रहती हैं। ज़्यादातर किताबें ऐसी मिलीं कि लगा बच्चे उन्हें न ही पढ़ें तो अच्छा।