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Riyaaz

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कहानी और कविता के साथ पकड़म-पकड़ाई में चित्रकार कला के कई दाँव-पेंच सीखता है। रंगों और लकीरों के कई जाल बुनता है जिसमें अर्थ का बाना पिरोता है। शब्दों को उसकी ऊँचाइयों तक ले जाने की कोशिश रियाज़ी लगातार करता है। शब्द से भाव और अभिप्राय तक पहुँचना जैसा कभी लेखक पहुँचा होगा और फिर उसे अपने चित्र में पा लेना। इस चित्र तक बार-बार पहुँचने का रियाज़ है, रियाज़।

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